36: दुनिया का पहला 'डिजिटल कैमरा' और उसका वजन 📸
1975 में कोडक (Kodak) कंपनी के एक इंजीनियर ने दुनिया का पहला डिजिटल कैमरा बनाया था। इसका वजन लगभग 3.6 किलोग्राम था (एक बड़े पत्थर के बराबर) और यह केवल 0.01 मेगापिक्सेल की ब्लैक एंड व्हाइट फोटो खींच सकता था। इसे एक फोटो सेव करने में 23 सेकंड का समय लगता था!
37: हार्ड डिस्क के अंदर 'हवा' नहीं होती! ❌💨
क्या आप जानते हैं? आपके कंप्यूटर या लैपटॉप की मैकेनिकल हार्ड डिस्क (HDD) के अंदर सामान्य हवा नहीं होती। उसे पूरी तरह से 'Vaccum' (हवा रहित) रखा जाता है या फिर उसके अंदर 'Helium Gas' भरी जाती है। अगर उसके अंदर धूल का एक छोटा सा कण भी चला जाए, तो हार्ड डिस्क तुरंत क्रैश हो जाएगी।
38: पहली कंप्यूटर स्क्रीन 'काली और हरी' क्यों थी? 📟
शुरुआती कंप्यूटरों की स्क्रीन आज की तरह रंग-बिरंगी नहीं, बल्कि पूरी काली होती थी और उस पर हरे रंग के अक्षर दिखते थे। ऐसा इसलिए था क्योंकि उस समय 'Phosphor' का इस्तेमाल किया जाता था, जो स्क्रीन पर हरी रोशनी छोड़ता था। इससे आंखों पर कम दबाव पड़ता था और यह तकनीक भी सस्ती थी।
39: क्या कंप्यूटर भी 'भूल' सकते हैं? (Bit Flip) 🌌
हाँ! अंतरिक्ष से आने वाली अदृश्य किरणें (Cosmic Rays) कभी-कभी कंप्यूटर की मेमोरी के अंदर मौजूद '0' को '1' में बदल देती हैं। इसे "Bit Flip" कहा जाता है। इसके कारण बिना किसी गलती के भी अच्छे से अच्छा कंप्यूटर अचानक रीस्टार्ट हो जाता है या क्रैश हो जाता है।
40: पहला 'सुपरकंप्यूटर' और उसकी घड़ी ⏳
1976 में बने दुनिया के पहले सफल सुपरकंप्यूटर Cray-1 की स्पीड आज के समय के एक बेहद सस्ते और साधारण स्मार्टफोन से भी हजारों गुना धीमी थी। तकनीक ने पिछले 50 सालों में इतनी तरक्की कर ली है कि जो सुपरकंप्यूटर एक बड़े कमरे में आता था, आज उससे ताकतवर चिप आपकी जेब में रहती है!
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